यह कैलकुलेटर कैसे काम करता है?
कई कोर्स में कुल अंक दो हिस्सों से बनते हैं: अब तक का काम (इंटरनल, प्रोजेक्ट, मिड-टर्म) और फाइनल परीक्षा। हर हिस्से का एक वेटेज होता है। लक्ष्य कुल प्रतिशत पाने के लिए फाइनल में कितना चाहिए, इसका सूत्र है: ज़रूरी अंक = (लक्ष्य − अब तक का प्रतिशत × (1 − वेटेज)) ÷ वेटेज।
एक उदाहरण
मान लीजिए आपके इंटरनल में 70% हैं, फाइनल का वेटेज 40% है और आपको कुल 60% चाहिए। तब बाकी 60% वेटेज पर आपके 70% गिने जाएँगे, जो 42 अंक देते हैं। लक्ष्य 60 है, यानी 18 अंक फाइनल से चाहिए। फाइनल का वेटेज 0.4 है, इसलिए 18 ÷ 0.4 = 45%। यानी फाइनल में 45% अंक काफ़ी होंगे।
नतीजे का मतलब
- 100% से ज़्यादा: लक्ष्य संभव नहीं है। लक्ष्य थोड़ा कम रखें।
- 0 या उससे कम: लक्ष्य पहले ही पूरा है, पर पास होने के नियम (जैसे फाइनल में अलग से 33%) अब भी लागू हो सकते हैं।
सुझाव
कई परीक्षाओं में फाइनल में अलग से न्यूनतम अंक लाने की शर्त होती है। अपने कोर्स का नियम देखें। इसी सूत्र से आप सेमेस्टर, कोचिंग टेस्ट सीरीज़ या किसी भी भारित (वेटेड) मूल्यांकन के लिए ज़रूरी अंक निकाल सकते हैं।