आधार नंबर की बनावट
आधार नंबर 12 अंकों का होता है और पहला अंक 2 से 9 के बीच रहता है। इसका आखिरी अंक एक चेक डिजिट है, जो बाकी 11 अंकों से Verhoeff एल्गोरिदम के जरिए निकाला जाता है। इस वजह से एक अंक भी गलत टाइप हो जाए तो चेकसम मेल नहीं खाता।
Verhoeff एल्गोरिदम क्या है?
यह डच गणितज्ञ जैकब वरहोफ का बनाया चेकसम तरीका है, जो एक अंक की गलती और दो पास-पास अंकों की अदला-बदली लगभग हमेशा पकड़ लेता है। यह सामान्य जोड़-घटाव से कहीं मजबूत है। इसमें तीन तालिकाओं का इस्तेमाल होता है और अंक दाएं से बाएं पढ़े जाते हैं।
इस टूल से क्या पता चलता है
- नंबर में सिर्फ अंक हैं और कुल 12 हैं।
- पहला अंक 0 या 1 नहीं है।
- चेकसम गणित से मेल खाता है।
क्या नहीं पता चलता
चेकसम सही होने का मतलब यह नहीं कि नंबर असल में किसी व्यक्ति को जारी हुआ है। इसके लिए केवल यूआईडीएआई की आधिकारिक सेवा भरोसेमंद है। अपना आधार नंबर अनजान वेबसाइट, कॉल या संदेश पर साझा न करें। यह टूल नंबर कहीं नहीं भेजता, सारी गणना आपके ब्राउज़र में होती है।