चक्रवृद्धि ब्याज क्या है?
चक्रवृद्धि ब्याज में ब्याज मूलधन के साथ-साथ पहले जुड़े हुए ब्याज पर भी लगता है। इसलिए रकम हर अवधि के बाद पहले से तेज़ी से बढ़ती है। इसे "ब्याज पर ब्याज" भी कहते हैं, और यही लंबे निवेश की असली ताकत है।
चक्रवृद्धि ब्याज का सूत्र
A = P × (1 + R ÷ (100 × n))n × T, जहाँ A कुल रकम, P मूलधन, R सालाना दर, n साल में ब्याज जुड़ने की संख्या और T साल हैं। चक्रवृद्धि ब्याज = A − P।
उदाहरण
10,000 रुपये पर 10% सालाना दर से 2 साल: पहले साल के बाद 11,000 रुपये, दूसरे साल के बाद 12,100 रुपये। चक्रवृद्धि ब्याज = 2,100 रुपये, जबकि साधारण ब्याज केवल 2,000 रुपये होता। अवधि जितनी लंबी होगी, यह अंतर उतना बड़ा होता जाएगा।
कहाँ काम आता है?
- FD, RD, PPF जैसी बचत योजनाओं में ब्याज की गणना।
- क्रेडिट कार्ड या लोन पर बकाया बढ़ने का अंदाज़ा।
- म्यूचुअल फंड के लंबी अवधि के रिटर्न का मोटा अनुमान।
72 का नियम
किसी रकम को दोगुना होने में लगने वाले सालों का मोटा अंदाज़ा 72 ÷ ब्याज दर से मिलता है। 12% पर रकम लगभग 6 साल में, 8% पर लगभग 9 साल में दोगुनी हो जाती है। चक्रवृद्धि की आवृत्ति जितनी ज़्यादा होगी, अंतिम रकम थोड़ी और ज़्यादा बनेगी।