RD क्या है?
रिकरिंग डिपॉज़िट (RD) में आप हर महीने एक तय रकम बैंक या पोस्ट ऑफ़िस में जमा करते हैं और अवधि पूरी होने पर जमा रकम ब्याज सहित वापस पाते हैं। जिन लोगों के पास एकमुश्त पैसा नहीं होता, उनके लिए यह बचत की आदत बनाने का सरल और सुरक्षित तरीका है।
RD मैच्योरिटी का फ़ॉर्मूला
भारत में RD पर आम तौर पर तिमाही चक्रवृद्धि मानी जाती है। M = R × ((1+i)n − 1) ÷ (1 − (1+i)−1/3), जहाँ R मासिक किस्त, i = सालाना दर ÷ 400 और n तिमाहियों की संख्या (महीने ÷ 3) है।
उदाहरण
5,000 रुपये महीने की RD 6.5% पर 12 महीने चलाएँ। कुल जमा 60,000 रुपये होगा और मैच्योरिटी रकम लगभग 62,143 रुपये, यानी करीब 2,143 रुपये ब्याज।
RD से जुड़ी ज़रूरी बातें
- किस्त समय पर न भरने पर बैंक जुर्माना लगा सकते हैं।
- RD का ब्याज भी आपकी आय में जुड़कर टैक्स योग्य होता है।
- अलग-अलग बैंक की दरें अलग होती हैं, इसलिए तुलना करें।
- पोस्ट ऑफ़िस RD की अवधि 5 साल की होती है और दर सरकार तय करती है।
RD या SIP?
RD में रकम और ब्याज तय रहते हैं, जबकि SIP में रिटर्न बाज़ार पर निर्भर करता है। कम जोखिम और छोटे लक्ष्य, जैसे 1-2 साल में किसी खरीद की तैयारी, के लिए RD ठीक है; लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए अक्सर SIP पर भी विचार किया जाता है।