EMI क्या होती है?
EMI यानी समान मासिक किस्त (Equated Monthly Instalment) वह रकम है जो आप लोन चुकाने के लिए हर महीने बैंक या NBFC को देते हैं। इसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। शुरुआती सालों में किस्त का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है, और समय के साथ मूलधन का हिस्सा बढ़ता जाता है।
EMI निकालने का फ़ॉर्मूला
EMI = P × r × (1+r)n ÷ ((1+r)n − 1), जहाँ P लोन की राशि, r मासिक ब्याज दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100) और n कुल महीनों की संख्या है।
उदाहरण
10,00,000 रुपये का लोन, 8.5% सालाना ब्याज पर 20 साल (240 महीने) के लिए लें, तो r = 0.085 ÷ 12 = 0.007083 होगा और EMI लगभग 8,678 रुपये बनेगी। 240 किस्तों में कुल भुगतान करीब 20.83 लाख रुपये होगा, यानी ब्याज ही लगभग 10.83 लाख रुपये।
EMI कम रखने के तरीके
- अवधि बढ़ाने से EMI घटती है, लेकिन कुल ब्याज काफ़ी बढ़ जाता है।
- ज़्यादा डाउन पेमेंट देने से लोन की राशि घटती है।
- अलग-अलग बैंकों की ब्याज दर की तुलना करें, 0.25% का फ़र्क भी लंबे लोन में बड़ी बचत करता है।
- बीच-बीच में प्रीपेमेंट करने से ब्याज और अवधि दोनों कम होती हैं।
ध्यान रखने वाली बातें
यह कैलकुलेटर घटती शेष राशि (reducing balance) पर आधारित है, जो बैंकों में आम है। प्रोसेसिंग फ़ीस, बीमा और अन्य शुल्क इसमें शामिल नहीं हैं। फ्लोटिंग रेट वाले लोन में ब्याज दर बदलने पर EMI भी बदल सकती है। अंतिम आँकड़े के लिए अपने बैंक का लोन स्टेटमेंट देखें।