हाइक या इन्क्रीमेंट क्या है?
हाइक वह बढ़ोतरी है जो कंपनी आपकी सैलरी में करती है, आम तौर पर सालाना अप्रेज़ल के बाद या नई नौकरी में जाने पर। इसे प्रतिशत में बताया जाता है। प्रतिशत से यह पता चलता है कि आपकी बढ़त बाज़ार और महँगाई के मुक़ाबले कैसी है।
सूत्र
- नई सैलरी = मौजूदा सैलरी × (1 + हाइक% ÷ 100)
- हाइक % = (नई सैलरी − मौजूदा सैलरी) ÷ मौजूदा सैलरी × 100
उदाहरण
मौजूदा सैलरी 40,000 रुपये महीना और हाइक 10% हो तो नई सैलरी = 40,000 × 1.10 = 44,000 रुपये, यानी 4,000 रुपये महीना ज़्यादा। इसी तरह अगर सैलरी 5,00,000 रुपये सालाना से 6,25,000 रुपये हुई, तो हाइक = 1,25,000 ÷ 5,00,000 × 100 = 25%।
हाइक को समझने के लिए
- हाइक के साथ महँगाई (लगभग 5-6% सालाना) की तुलना करें, तभी असली बढ़त समझ आती है।
- नई नौकरी में हाइक की तुलना केवल फ़िक्स्ड सैलरी से करें, वेरिएबल पे से नहीं।
- हाइक के बाद इनकम टैक्स का स्लैब भी बदल सकता है, इसलिए इन-हैंड बढ़त कम दिख सकती है।
- मोलभाव से पहले अपने रोल की बाज़ार सैलरी का अंदाज़ा लें।
इन-हैंड पर असर
हाइक का पूरा हिस्सा आपके हाथ में नहीं आता, क्योंकि PF और टैक्स भी बढ़ते हैं। नई सैलरी का वास्तविक असर देखने के लिए हमारा CTC से इन-हैंड सैलरी कैलकुलेटर भी इस्तेमाल करें।